कुछ दिनो बाद बार्मणी के एक पुत्र का जन्म हुआ । पुत्र का नाम मंगल रखा । एक दिन ब्रामण जंगल से घर आया। घर में मंगल को देखकर ब्रामण ने ब्रामणी से पुछा कि यह बालक कौन है। ब्रामणी ने कहा कि उसे हनुमान जी ने एक बालक दिया हैं । पत्नी कि बात छल से भरी जानकर उसने सोचा कि यह वेभचारणी अपना पाप छिपाने लिए ऐसा बोल रही । एक दिन ब्रामण कुएँ पर नहाने जा रहा था । तो ब्रामणी ने कहा कि मंगल को भी साथ ले जाओ । ब्रामण उसे ले गया ओर उसे कुएँ मे डालकर वापस आ गया । घर आते हि ब्रामणी पूछा कि मंगल कहा है। इतने मे मंगल मुश्कराता घर आ गया । ब्रामण यह देखकर चकित रह गया। उसी रात हनुमान जी ने उसे सपने दर्शन देकर कहा कि तुम पत्नी को क्यो लडते हो मंगल तो मेने दिया है। यह सुनकर ब्रामण पर्शन हुआ । दोनो पति - पत्नी पर्शनतापूर्वक रहेने लगे।